Thursday, April 16, 2009

अलगाववाद या सज्जाद :वादी की बदल रही है तस्वीरे

पीपुल कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन का चुनाव में आना कोई बड़ी ख़बर नही है ,लेकिन कश्मीर में यह आज की तारीख में बड़ी ख़बर है । ये वही सज्जाद लोन है जिन्होंने पिछले असेम्बली इलेक्शन में चुनाव वहिसकार का नारा दिया था और बड़ी बड़ी रैली निकली थी । सज्जाद लोन की अपील को दरकिनार करते हुए लोगों ने ६५-७० फीसद पोलिंग दर्ज की थी । हुर्रियत कांफ्रेंस सहित तमाम अलगाववादी लीडरों ने आतंकवादी संगठनों से हाथ मिलाकार पिछले चुनावों को वहिष्कार करने की जी तोड़ कोशिश की है । लेकिन लोगों ने अलगाववाद की तमाम थेओरी को खारिज कर दिया था । शायद दीवार पर लिखी इबारत को सज्जाद लोन ने पढ़ लिया है । सज्जाद लोन मानते है कि जनता जब आपकी बात को पुरी तरह अनसुनी करती है तो आपको बदली स्थिति में ख़ुद बदलना होगा । सज्जाद लोन कहते हैं कि पिछले २० वर्षों में एक ही नारे एक ही सुर ताल से लोग उब गए है । वादी की सिआसत में एक नई सुरताल देने की जरूरत है । यानि लोकतंत्र में सियासत एक धारा है जो हमेशा बहते रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है । लेकिन कश्मीर में सियासत को कुछ लोगों ने अपना कारोबार बना लिया था । शेख अब्दुल्लाह की तीसरी पीढी आज सियासत में अपनी पारी खेलने आ गया है , लेकिन अलगाववाद की सियासत में आज भी वही चेहरे हैं जो ४० साल पहले थे ।
सज्जाद लोन इस धारा को नई रूप से परिभाषित करना चाहते हैं । उनका मानना है की अलगाववाद और अलगाववादी दो अलग अलग चीज है । उनका मानना है कि अलगाववाद के अपने रास्ते से वे अलग नहीं हुए है । यानि कल तक कश्मीर के मामले को लेकर वे गली और नुक्कडों में प्रदर्शन करते थे अब उनका प्रदर्शन संसद में होगा । यानि देश की सर्वोच्च पंचायत में अब वे अपनी बात रखेंगे । २३ जमातों के हुर्रियत कांफ्रेंस में सिर्फ़ पीपुल कांफ्रेंस ऐसी जमात हैं जिसके पास सियासी जमीन है तो सियासी कारकून भी । यासीन मालिक को भले ही मीडिया में अच्छी पहुँच हो लेकिन डॉन टाऊन इलाके में उन्हें दफ्तर खोलना होता है तो इसके लिए भीड़ उन्हें पीपुल कांफ्रेंस से ही जुटाना पड़ता है । यानि कह सकते हैं कि सज्जाद लोन एक प्रयोग है जिसके बदौलत हुर्रियत के लीडर अपनी अलग सियासी जमीन तैयार करना चाहते है । पिछले २० साल में यह पहलीबार है जब हुर्रियत कांफ्रेंस ने चुनाव बायकाट से अपने को अलग राखी है । यानि चित भी मेरी पट भी मेरी । सज्जाद लोन अगर जित गए तो वादी में एक अलग सोच की जीत होगी अगर हार गए तो हुर्रियत के तमाम जमात उनसे पीछा छुडा लेगी । वादी में कभी १५से २० फीसद पोलिंग का रिकॉर्ड रहा हा बदले दौर में यह फीसद ७०-७५ फीसद तक पहुच गई है । जाहिर है लोगों ने कश्मीर की राजनितिक तस्वीर साफ़ कर दी है अब लीडरों को अपनी स्थिति साफ़ करनी ही है । सज्जाद ने अपनी ओर से पहल कर दी है ।